तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझेमगर देख मोहब्बत में शामिल कोई दूसरा ना होकिस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही हैतड़पकर यह मुझे दर्द दे रही हैदिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं कियाफिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही है
तू हज़ार बार भी रूठे तो मना लूँगा तुझे
मगर देख मोहब्बत में शामिल कोई दूसरा ना हो
किस्मत यह मेरा इम्तेहान ले रही है
तड़पकर यह मुझे दर्द दे रही है
दिल से कभी भी मैंने उसे दूर नहीं किया
फिर क्यों बेवफाई का वह इलज़ाम दे रही है
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